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वास्तविकता वक्रता क्षेत्र

{विकिपीडिया के लेख reality distortion field (RDF ) द्वारा प्रभावित } :
 Reality Distortion Field यानी "वास्तविकता वक्रता क्षेत्र " कह कर बुलायी जाने वाली विवरणी की रचना सन 1981 में एप्पल कंप्यूटर इन्कोर्पोरैट में कार्यरत बड ट्रिबल ने करी थी / इस विवरणी के माध्यम से वह एप्पल कंप्यूटर के संयोजक स्टीव जोब्स के व्यक्तित्व को समझने के लिए किया था / ट्रिबल "वास्तविकता वक्रता क्षेत्र" के प्रयोग से जोब्स की स्वयं के ऊपर (अंध-)विश्वास करने की क़ाबलियत और अपनी कंपनी में कार्यरत लोगों को भ्रमित विश्वासी कैसे बना कर बहोत ही मुश्किल से मुश्किल काम कैसे करवा लिए , यह वर्णित करते हैं /
    ट्रिबल का कहना था की यह विवरणी टीवी पर दिखाए जाने वाले एक विज्ञान परिकल्पना के धारावाहिक 'स्टार ट्रेक' से उन्होंने प्राप्त किया था /
    "वास्तविकता वक्रता क्षेत्र " एक मनोवैज्ञानिक दशा है जो हर एक इंसान में उसके आसपास मौजूद मन-लुभावन वस्तुएं , व्यक्ति ; वाहवाही वाले कृत्य (bravado) ; अतिशोयक्ति (= hyperbole); विक्री-प्रचार ; शांति और रमणीयता के आभास देने वाले जीवन-शैली ; और किसी वस्तु अथवा व्यक्ति के हट (stubborn) समान पुनर-आगमन ; - के द्वारा निर्मित होता है / 
    "वास्तविकता वक्रता क्षेत्र " के प्रभाव में व्यक्ति किसी भी आत्म-चेतना सम्बंधित विषय (subjective issue ) या वस्तु पर एक संतुलित आकलन नहीं कर पाता है/ इस प्रकार आत्म-चेतना सम्बंधित विषय पर हर व्यक्ति का अलग पैमाना तैयार होता है और हर व्यक्ति ऐसे विषय पर अलग-अलग राय निर्मित करता है / यहाँ तक की कुछ लोग जिसे अच्छा समझते हैं , कुछ अन्य उसे ख़राब मानते हैं / हमारे पैमाने 'बहोत अच्छा ', 'अच्छा' , 'ठीक ही है ', 'ख़राब' से लेकर 'बहोत ख़राब ' के बीच अलग-अलग शब्दकोष के माध्यम से अंतर करते रहते हैं / भारत की सांकृतिक प्रष्टभूमि में इस विवरणी का बहोत आवश्यक प्रयोग है /
     एक अन्य सांकृतिक समझ में "वास्तविकता वक्रता क्षेत्र " को "माया जाल " के व्यक्तव्य में भी समझा जा सकता है / मौजूदा भारतीय जीवन में हमारे आस-पास "वास्तविकता वक्रता क्षेत्र " के संसाधन बहोत ही ज्यादा मात्र में उपलब्ध है , और इनसे उत्पन्न होने वाले वक्रता के निवारण के संसाधन करीब-करीब न के बराबर हैं / हमारी सिनेमा निर्माण उद्योग (बॉलीवुड ), समाचार वितरण प्रणाली (मीडिया), विक्री-प्रचार उद्योग (advertising and publicity ), यह सब के सब हमे हर पल भ्रमित करने में तल्लीन होते हैं , जबकि सत्य का रहस्य उदघाटन करने के विश्वसनीय संसाधन नहीं हैं / संक्षेप में , हमारा "वास्तविकता वक्रता क्षेत्र " बहोत दीर्घ है , और सत्य-स्थापन संसाधन करीब करीब विलुप्त हैं /
    ज्ञान और जानकारी की हमेशा से यह आपस में संबधित विशेषता रही है की जानकारी जितना बड़ती हैं , इंसान उतने ही सटीक निर्णय लेने के काबिल बनता है , मगर साथ ही साथ उतना ही भ्रमित होने का भी पात्र बनता है / जानकारी को सही से संयोजना एक अवावश्यक कार्य है अन्यथा वही जानकारी हमे भ्रमित कर विनाश भी करवा सकती है /

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