मोदी जी का ब्याह और उनकी सुबूतों से छेड़खानी की लत

मोदी शादी शुदा हैं या कि नहीं - यह मुद्दा नहीं है। मुद्दा फिर से वही है - सबूतों और बयानों से छेड़ छाड़ की लत जो कि न्याय को प्रभावित कर रही है और सामाजिक सौह्र्दय पर प्रभाव।
1) आप अपनी शादी शुदा जीवन का खुलासा एक संवैधानिक संस्था(निर्वाचन आयोग) के आगे नहीं करते हैं। यह जानकारी आपकी आय, भ्रष्टाचार निवारण, सामाजिक आचरण इत्यादि के लिए महतवपूर्ण तथ्यों का आधार होती है।
2) आप किसी महिला की जासूसी करवाते हैं और पुलिस अधिकारी पूरे खुलासे के लिए न्यायपालिका के समक्ष भी मना कर देता है।
3) आपके राज्य के कितने ही उच्च पदाधिकारी आपसे वैचारिक मतभेद में हैं और आप ने उन्हें प्रताड़ित करने के कीर्तिमान स्थापित किये हुए हैं। संविधान की मंशा के अनुसार शासन शक्ति को राजनेता और प्रशासनिक अधिकारियों के मध्य में संतुलित कर के रखना था। आपने स्पष्ट तौर पर शासन शक्ति अपने पक्ष में कर ली हैं। और आप यह कर्म का तर्क-मरोड़ प्रचार भी करते हैं - "minimum government, good governance" कह कर। आपने व्यवस्था नियंत्रण के सरल उपाए नहीं खोजे हैं , बल्कि वर्तमान प्रणाली में जी परस्पर-नियंत्रण-और -संतुलन (checks and balances) हैं उन्हें तोड़ कर शॉर्टकट खोल दिए है । आप वास्तविकता में अराजकता के बीज बो रहे हैं और इसकी फसल अगले 10-15 सालों बाद सभी को काटनी पड़ेगी।
संक्षेप में कहे तो आप प्रमाणों , सबूतों , बयानों और न्याय का तनिक भी सम्मान नहीं करते हैं और इसीलिए आप पर तानाशाह होने का आरोप लगाया जा रहा है।
   आप प्रधानमन्त्री बने तब कई सारी संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा भंगित करेंगे, अपने "minimum goverenment, maximum governance" की चपेट में ला कर। अभी कांग्रेस से हुयी बदहाली से उबरे भी नहीं हैं और "अबकी बार मोदी सरकार" हो जायेगा।

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