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कठोर व्यवहार प्रबंधन पद्धति और भेदभाव का होना

एक कारण की भारत के कार्यालयों में श्रमिक या कर्मचारी आज भी जातपात या किसी भी अन्य कारणों से उत्पन्न भेदभाव , उत्पीड़न, इत्यदि का आरोप लगाते रहते हैं ,वह यह है की भारत में प्रबंधन के स्वाभाविक तरीके आज भी तानाशाही, क्रूरता और *कठोर नियंत्रण* व्यावहारिक क्रियाओं पर चलते हैं। ऐसे में, जहां *प्रजातांत्रिक प्रबंधन व्यवहार* नही होते हैं, वहां किसी न किसी के ख़िलाफ़ अन्याय होता ही है, जिसको बलि का बकरा बनाना आततायी प्रबंधन अधिकारी की आवश्यकता होती है ताकि वह अपने "श्रेष्ठ प्रबंधन नीति" के उदाहरण प्रस्तुत करके अपनी "श्रेष्ठता" सिद्ध कर सके।

द्वितीय, की " *कठोर* " प्रबंधन व्यवहार नीति में न्याय के बुनियादी सिद्धांत - कार्यकारणी शक्ति और न्यायायिक शक्ति का विभाजन- इसका पालन नही किया जाता है। *No Separation of Executive function and judicial function* .

" *भारतीय कठोर व्यवहार प्रबंधन पद्धति*" क्या है ?

-- जिसके पास किसी कार्य करने की शक्ति दी जाती है, उसी को आदेश के उलंघन होने पर दंड की शक्ति स्वतः दे दी जाती है। दुनिया के न्यायायिक मानकों में इस परिस्थिति में अब तो अन्याय होना स्वतःस्फूर्त मान लिया गया है।

" *कठोर व्यवहार* " प्रबंधन नीति में " *क्रमिक न्याय* "( _hierarchical justice_ )  का ही पालन होता है, अन्यथा कोई भी प्रबंधन अधिकारी कठोर होने की हिमाकत भी नही करेगा। तो फिर ज़ाहिर है की boss (वरिष्ठ अधिकारी) को हमेशा सही होना है, और अवर अधिकारी को ही ग़लत होना है। इसमे *प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों* (principles of Natural Justice) का पालन नही किया जा सकता है।

तो फिर अब भेदभाव होता है , वरिष्ठ प्रबंधन अधिकारी के व्यवहार प्रियवर और अप्रियवर सूची के अनुसार बदलते रहते हैं ,  दोस्ती -दुश्मनी , "ego" समस्याएं स्वतः जन्म ले ही लेती हैं -- मूल कारण # *कठोर_व्यवहार* प्रबंधन पद्धति है।

https://thewire.in/caste/intelligence-bureau-discrimination-harassment

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