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Teaching of Civics and History to the students in India - a defect in our education system

 In the Education System, we are spending more energy in teaching the history around the development of the Constitution, which unfortunately doesn't bear any lessons or perspective to reveal to the learners the foundation of those legal principles which are enshrined within the Constitution.


Thus, we are not spending a single dime of efforts to ensure the robust implementation of the Constitution by our generations. Instead we are spending energy to teach those topics and events of our History which can , at best, be used to Itch the old wounds and make them worse.


I am firmly of the opinions that secondary school level teaching must bring certain changes in the curriculum of  History and Civics, and start teaching about the foundation /history behind the Legal Principles by which the high ideals of the Constitution can be implemented by the students by practising the values in their day today lives.


The workplace harassment, the unfairness is a very casual event within the Indian social space . And these things are happening because the Indian laws are still too much lacking to protect the innocent , to prevent the harassment. Justice , within Indian set-up , is repeatedly becoming Political, rather than procedural . That is why "politics" or an undesired clubbing of people happens in order to protect their interest against those whom perceive as the offender.


And why is the Justice always political in an average Indian social Club? 

Because people do not have basic knowledge of the Judicial principles by which they should conduct their business and professional relationship .

Fake News और Fact Check में भी जालसाज़ी की strategy

 *Fake News और Fact Check में भी जालसाज़ी की strategy !* 


आजकल IT Cell वालों की एक startegy यह भी है कि खुद ही झूठ फैला कर फिर उसका fact check करके "भंडाफोड़" कर लो, जिससे कि खुद सत्यवान साबित हो जाओ !!


अर्रे, कभी कभी तो एक स्ट्रेटेजी के तहत ऐसा भी करते हैं कि झूठ फैलाते हैं और फिर ख़ुद ही उसे fact check में पकड़वा  करके fact check में ही नया झूठ फैला देते हैं ! यानी fact chcek में ही झूठ फैला दिया, जिससे लोग और ज्यादा विश्वास के साथ झूठ पर विश्वास कर बैठें !!


😁😁


गज़ब चालाक लोग है

भारत में 'कानून' और 'धर्म' में संबंध नही है

 कानून और धर्म में संबंध नही है। जो की विचित्र बात है।

कानून का संबंध roman canons से है, धर्म(dharmic faith) से नही है। ये वो बड़ी बात है जो की आधे से ज़्यादा भारतीयों की बुद्धि में घुस नही रही है !
कानून शब्द का आगमन तुर्की भाषा में से होता है, और यह समाज में सही और ग़लत की मर्यादाओं को प्रतिबिम्बित करता है। मगर कौन से समाज ? रोमन प्रथाओं वाला समाज।

भारत में जाहिर है कि कानून अपनी मूल रचना में नही मिल सकता था
उसके स्थान पर भारत में धार्मिक मर्यादाये थी।

जो कुछ भी रोमन विचारधाराओं से प्रभावित समाज में सही और ग़लत हुआ करते थे, उनमे से ग़लत को घटने से रोकने के लिए समाज में canons आये। वही तुर्की भाषा में कानून कहलाये ।

एक अन्य मिलता जुलता शब्द cannon का अर्थ होता है तोप से। कृपया confuse मत होइएगा।
रोमन समाज बाद में ईसाई धर्म के अन्तर्गत चले गये। इसलिये हम केह सकते हैं कि ज्यादातर कानून ईसाई धर्म के स्थापित मानक वाले सही और ग़लत में से निकलते हैं। कहने का मतलब है कि उनका संबंध भारत की धार्मिक मर्यादाओं से नही है।

शायद अब हम समझ सके कि भारत में कानून का पालन कमज़ोर क्यों होता है ? सीधा जवाब है, कि कानून तो भारतीय समाज में जाना ही नही जाता है ! इसका भारत के native धर्म , पौराणिक धर्म, से सम्बन्ध ही नही है !
तो जब सवाल उठता है कि "फंलाना कर्म में ग़लत क्या है?", तब जवाब पल पल यही मन में आता है कि "कुछ भी तो नही!" । भाई मर्यादाओं को भारतीय मानव स्वचेतना से जान लेने का काबिल है, मगर "ग़लत" का कैसे हो सकता है?! भारत भूमि का आदमी कोई roman थोड़े ही है !

यह होता होगा कि रोमन कानून में किसी को सज़ा केवल राजा ही दे सकने का अधिकार रखता है, और सज़ा से पूर्व एक न्याय पालिका के समक्ष सवाल जवाब किये जाएंगे, जहां प्रमाण देने होंगे, दोनों पक्ष बराबर होंगे और यहाँ तक की राजा की पुलिस का पक्ष भी आरोपी के बराबर का स्थान ही रखेगा !

मगर यह सब भारतीय मर्यादाओं के अनुरूप नही है। भारत में "धर्म" है। यहाँ पहले किसी का "वध" या "संहार" किया जाता है, और फ़िर लेख/ग्रंथ लिख-लिख कर उसका चरित्र हरण करके उसे अधर्मी,।विधर्मी साबित कर दिया जाता है। यहां कोई न्यायपालिका नही होती है। जहां सज़ा से पूर्व यह कार्यक्रम किया जाये। और सबसे बड़ा खोट - कि, कैसे राजा की पुलिस का स्थान किसी आरोपी के बराबर का हो सकता है ?!!

नही , न?

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