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'शक्तिशाली होने में' और 'प्रभावशाली होने में' अंतर होता है

 'शक्तिशाली होने में' और 'प्रभावशाली होने में' अंतर होता है। गांधी एक प्रभावशाली व्यक्ति थे, शक्ति तो उनके पास कोई थी ही नहीं। देखा जाये तो वह किसी भी औपचारिक पद पर नहीं थे ! मगर तब भी, ब्रिटिश उनसे ही वार्तालाप करते थे, क्योंकि जनता के दिलों पर गांधी का ही राज था।

शक्ति आखिर में क्या होती है?

तमाम तरह की परिभाषाओं में एक बिंदु यह भी है कि प्रभावशाली होना ही तो वास्तविक शक्ति होती है। वो जो दिलो पर राज करें, वो जिनकी बातों को जनता सुनने को तैयार हो, बिना किसी ज़ोर ज़बरदस्ती , भय या दबाव के - वही जनप्रिय व्यक्ति ही वास्तविक शक्तिशाली होता है। वर्ना, शक्ति यानी Power तो सरकारी ओहदों पर बैठे हुए व्यक्तियों के पास भी होती है - प्रशासनिक शक्ति, जिसमे राज्य की तमाम सैनिकिय शक्ति कानून के व्यूह से बंधी हुई आदेशों का पालन करने हेतु बाध्य होती हैं। मगर ऐसी प्रशासनिक शक्ति के प्रयोग से कोई भी दीर्घ प्रभावी उद्देश्य प्राप्त नही किया जा सकता है। न ही इस शक्ति के प्रयोग से सत्य निष्ठा से इंसानो को बदला जा सकता है।
तो प्रशासनिक शक्ति (Administrative Power) होती तो तुरंत प्रभावी है, और आसानी से हस्तांतरित करि जा सकती है। इससे तुरत उद्देश्य प्राप्त किये जा सकते है, ,मगर जनता के भीतर बदलाव नही किये जा सकते है। समाज में बदलाव के लिए influential power (प्रभावशाली व्यक्तिव की शक्ति) ही चाहिए होती है। वो जो कि गांधी के चरित्र में थी, या आज अमिताभ बच्चन में दिखाई पड़ती है।
तो प्रभावशाली होना एक प्रकार से शक्तिशाली होने जैसा ही है, मगर जिसमे कोई औपचारिक ओहदा नही मिलता है। प्रभावशाली व्यक्तिव की शक्ति को कभी भी हस्तांतरण करके प्राप्त नही किया जा सकता है। इसे तो हर व्यक्ति को कमाना पड़ता है, अपने खुद के कर्मों , विचारों और व्यक्तिव से, दशकों की मेहनत करके। एक साख़ (reputation) बना कर के, जिसके निर्माण में दशकों की सिंचाई की मेहनत लगती है।
गांधी को जिम्मेदार नही ठहराया जा सकता है कि भगत सिंह की फाँसी रोकने के लिये गांधी ने कुछ कार्यवाही नही करि थी। गाँधी शक्तिशाली नही थे, बल्कि प्रभावशाली थे। और उनके प्रभाव की शक्ति जिन कर्मो और विचारों से निर्मित हुई थी, भगत सिंह उन विचारो के विपरीत थे, हालांकि गंतव्य गांधी और भगत सिंह - दोनों का ही एक था।
गाँधी की शक्ति उनके प्रभाव शाली व्यक्तिव की थी।

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