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पाश्चात्य संगीतकार elvis preseley का योगदान आधुनिक विश्व को

पश्चिमी जगत के आधुनिक काल के सांस्कृतिक इतिहास में elvis presley का जन्म बहोत महत्वपूर्ण माना जाता है। जैसे 16वी और 17वी शताब्दी में reniassance और reformation सांस्कृतिक इतिहास की महत्वपूर्व काल थे, वैसे ही 20वी शताब्दी में elvis presely का आगमन !

क्यों? ऐसा क्या योगदान दिया elvis ने ?

आज हम जब भी बाज़ार जाते हैं तब कोई न कोई music cd यूँ ही आसान दिमाग से, बिना कोई ज्यादा सोच में समय व्यर्थ करे खरीद लेते हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि ये music industry का आरम्भ कैसे हुआ है।

और तो और, अब आज के युग में "सभी किस्म का" music सुनना और प्रस्तुत करना पसंद किया जाता है। मगर क्या आपको मालूम है कि पहले के युग में ऐसा नहीं हुआ करता था।  पहले भेदभाव और असमानता का युग था। समाज में भेदभाव का चलन था। पश्चमी जगत काले-गोरे के रंगभेद से बहोत अधिक ग्रस्त हुआ करता था। राजनैतिक आयाम में जहाँ गाँधी और लूथर किंग जैसे महान नायक सामाजिक अन्याय के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे थे, वही किसी एक गायक ने अनजाने में अपने सुरों और संगीत से भेदभाव को सांस्कृतिक तौर पर समाप्त करने में भूमिका निभाई थी। इतनी सफलता के साथ, की शायद आधुनिक पीढ़ी को याद ही नही रह गया कि अतीत में तो संगीत और सुरों में तक इंसानी समाज ने भेदभाव किया हुआ है।

विश्व संस्कृति को ये दोनों ही धरोहर Elvis Presley से मिली है।

काले, अफ्रीकी मूल के लोग में कुछ गला फाड़ कर, चिल्ला कर गाने का चलन आज भी है। अफ्रीका महाद्वीप बेहद गर्म और कठोर क्षेत्र है, पानी दुर्लभ होता है, और जीवन बेहद मुश्किल। मगर उनके कबीली जीवन में संगीत फिर भी शुरू से ही था। हालांकि वो इनके विशिष्ट तरीके के था। मसलन ध्वनि के विभाग में -  गला फाड़ कर गाना, सुर- ताल के विभाग में - percussion यानी पीछे से गूँज करने वाले वाद्य यंत्रो (ढोल, drum, झुनझुना) का प्रयोग,  शब्दों के विभाग में - हल्के विचार, जो आँखों या शरीर के इंद्रियों से पकड़े जाने वाले बात को बताते है। कोई गेहरे जज़्बात नहीं।

आगे जा कर अफ्रीकी लोग जिस भी महाद्वीप में गये, अपना संगीत साथ ले गये। फ़िर उनकी संस्कृति में से jazz music और rythm and blues का जन्म हुआ। 

गोरे लोगों के समाज में ये दोनों ही कालो अफ्रीकियों का music देखा जाता था। वो इसे निम्म किस्म का संगीत मानते थे और इसे सुनाना पसंद नही करते थे। गोरों का आरोप था कि कालो का संगीत को गहरी,  दिमाग को जागृत करने वाले बात नही कह रहे होते थे। गौरे समाज का मानना था की कालों के संगीत में बस शारीरिक ज़रूरते - भोजन, कपड़ा, मकान, और sex तक ही इनकी बात सीमित होती थी। 

इसके बनस्पत गोरों का खुद का संगीत , उनके अनुसार - साफ़ सुथरा था। ईश्वरमयी, और कोई नयी जागृति को प्रस्तुत करने वाला। ईश्वर को धन्यवाद करने वाला। यंत्रो के मामले में - सटीक ध्वनि वाले यंत्र जैसे कि guitar, सीटी । गले को सजो कर गाने की शैली - मतलब , आवाज़ को बीच-बीच में ऊँचा नीचा करना , कहीं लंबा कहीं छोटा करना, एक लय को बनाये रखना, छद्म को पुनरावृति या लय को पुनरावृत्ती करना। गेहरे जज़्बातों को बयान करना। वगैरह। उनका संगीत country music कहलाता था। 

उस युग में भेदभाव न सिर्फ समाज में था-बल्कि एक मानसिकता बन कर हर क्ष्रेत्र में था। संगीत में भी । कालों का संगीत अलग, और गोरों का अलग। गोरों के अनुसार कालों का संगीत फूहड़ था,  हल्का और  छिछला।  कालों का अपने ही संगीत नायक थे -  bob marley। मगर वो गोरों को पसंद नही आते थे।

फ़िर elvis presley ने क्या योगदान दिया इन हालात में?

Elvis ने दोनों अखाड़ों को आपस में जोड़ दिया, fusion बना दिया ! और वही pop music कहलाने लगा। elvis को rock and roll एक ख़ास तौर की संगीत शैली का जनक माना जाता है। इस शैली में दोनों विशिष्ट अखाड़ों का मिलन हो जाता है। वाद्य यंत्र बीच-बीच में percussion वाले भी सुनाई पड़ते है, जो कि कालों के यंत्र समझे जाते थे। और lead में guitar भी था।

Elvis का बड़ा योगदान ये था कि उनका संगीत लोगों में इतना पसंद आने लगा कि उसे pop music करके बुलाया जाने लगा । और उसके इर्द गिर्द recording studio की नयी industry जन्म ले ली। elvis के गानों के ग्रामोफोन record हाथों हाथ बिकते थे और हर gramophone record पिछले वाले से भी अधिक संख्या में बिकता था।  इनकी विक्री लाखों से बढ़ कर करोड़ो की ओर जाने लगी। इतनी demand थी बाज़ार में । तो इतना gramophone player और record का निर्माण करने के लिए नये कारखाने भी चाहिए थे। ये सब करते करते एक पूरी music industry ही जन्म ले ली, जिसे हम आज इस नाम से जानते हैं।



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