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नैतिकता तथा व्यापार और चोरी, डकैती, लूटपाट में अन्तर

बौद्ध की बात यह है कि डकैती, लूटपाट, चोरी के जैसे दुत्कर्मों और व्यापार के मध्य में कोई भी अन्य अन्तर नहीं होता है सिवाय नैतिकता और आदर्शों के पालन के।

अगर नैतिकता को मध्य से हटा दिया जाये, तब फ़िर आसानी से whitewash करके किसी भी डकैती वाले दुत्कर्म को मेहनत वाला, लगन से किये जाने वाला व्यापार दिखाया जा सकता है।

भई, गब्बर सिंह जी अपने गाँव के लोगों को बाकी डाकुओं के क़हर से सुरक्षा देते थे, और उसके बदले अगर थोड़ा से अनाज ले लिए तो क्या ग़लत किया उन्होंने?
और फ़िर कितने ही लोगों को रोज़गार भी तो दिया हुआ था, अपने दल में सदस्यता दे कर। 
उनके काम में जोखिम कितना था, आप सच्चे दिल से सोचिये । बहादुरी किसे कहते हैं, यह गब्बर सिंह जी के भीतर अच्छे से कूट कूट कर भरी थी।

और अगर उसके बदले थोड़ी सी पी ली, मौज़ मस्ती कर ली, बसंती को नचवा लिया, तब इसमें क्या ग़लत किया ? मेहबूबा ओ मेहबूबा तो काम के समय की मीटिंग में होना कोई ग़लत नही है। शहर की डीएम साहिब लोगों की मीटिंग अपने क्या श्रीदेवी के गाने पर डांस करते नही देखा है?

मसलन, नैतिकता और आदर्शों को यदि त्याग कर ही दिया जाये तब फ़िर व्यापार और डकैती में बाकी कोई भी फर्क नही होता है।

एक रत्ती भी नहीं।





The थू थू model of decision-making within the Sanghi House

ये तो असल मे भाजपा और संघी व्यवस्था की "खुराक" (भोजन) है।

संघी व्यवस्था असल मे थू-थू किया जाने से ही चलती आयी है।  
 *The थू थू model of functioning within the Sanghi House* 

1) सबसे पहले तो कुछ भी औनापौना कर्म कर देते हैं। 

2) फ़िर लोगो की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करते है। 

3) यदि ज्यादा थू थू हो जाती है, तब चुपके से उसमे बदलाव, सुधार या  कि पूरा से वापस (roll back) कर लेते हैं। 

लोग थूक कर चाटने को बेइज़्ज़ती का काम मानते हैं। संघियो ने बाकायदा इसे funcrioning technik बनाया हुआ है।

करोना vaccine के तीन दान मोदी जी ने बाकायदा announce किये थे।
वो तो जब केजरीवाल ने protocol तोड़ कर public में थू थू कर दी, तब चुपके से बदलाव कर दिया और अब free vaccine देने लगे हैं

साथ मे ads दे दे कर वाहवाही लूटने में जुगत लगा रखी है

यूपी के नेताओं की working theory

पता नहीं क्या चक्कर है,

मगर यूपी का हर नेता और नेता बनने की महत्वकांशा रखने वाले आदमी, उसमे एक stereotype हरकत देखी जा सकती है, कि-

Twitter और Facebook पर कुछ eloquent expressions वाली post करते रहते हैं,  कुछ limited सी vocabulary में, repetititve हो कर, जैसे मानो जैसे कोई good expression सम्बधित किसी intellectual impairment बीमारी से पीड़ित है।

Post एकदम संक्षिप्त सी होती है, कुछ भी नवीन नही होता - दर्शन, भावना , वर्णन - कुछ भी। और फ़िर ये पोस्ट शब्दकोश की कंगाली झलकाती से दिखाई पड़ने लगती हैं

बौद्धिक साहस (Intellectual Courage) से निर्धन ये नेता , कुछ भी ज्वलंत , उत्तेजनापूर्ण , अथवा विवादास्पद लिखने से डरते है। इनकी नेतागिरी करने की एक सोच और परिपाटी होती है, एक।working theory, जिसके अनुसार विवादास्पद कथनों और विचारो से बच कर निकल जाने से ही नेतागिरी चमकायी जा सकती है।

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